शुभ योगों में हरियाली अमावस्या आज, श्रीहरि-शिव संग प्रकृति की होगी आराधना, पढ़ें क्या है शुभ मुहूर्त

हरियाली अमावस्या आज, शिव और विष्णु पूजा के साथ प्रकृति आराधना का खास महत्व

हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। सावन महीने में पड़ने वाली इस अमावस्या पर भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की पूजा के साथ प्रकृति की आराधना करने की परंपरा है। इस दिन पेड़-पौधों की पूजा और पौधरोपण को भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं, प्रकृति की पूजा और पौधे लगाने को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ और जलाभिषेक भी करते हैं।

पूजा और दान का विशेष महत्व

हरियाली अमावस्या के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों को दान करने को भी शुभ माना जाता है।

कई स्थानों पर इस दिन पितरों की शांति के लिए भी पूजा और तर्पण किया जाता है। परिवार की सुख-समृद्धि और पूर्वजों की शांति के लिए लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

प्रकृति की आराधना क्यों की जाती है?

हरियाली अमावस्या का सबसे खास संदेश प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ा है। सावन में चारों ओर हरियाली रहती है और इस अवसर पर पौधे लगाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता के साथ इसे पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस दिन लोग घर, मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाते हैं। मान्यता है कि पेड़-पौधों की सेवा और संरक्षण से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव मजबूत होता है।

कैसे करें पूजा?

सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। हरियाली अमावस्या पर पौधरोपण करना इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है।

पूजा का सही समय और मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग या विद्वान की सलाह लेना उचित रहेगा।

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